101 va Samvidhan Sanshodhan Kab Hua – भारत सरकार को जब भी ऐसा लगता है कि लोगों के लिए कोई नया कानून बनना चाहिए या फिर पिछले कानून में बदलाव करना चाहिए तो इसके लिए सरकार संविधान में संशोधन करती है। आपको बता दे की जुलाई 2025 तक भारतीय संविधान में कुल 106 बार संशोधन किए गए हैं। आज के इस आर्टिकल के द्वारा हम आपको 101 va samvidhan sanshodhan kab hua से सम्बन्धित पूरी जानकारी देने वाले हैं।
आप किसी भी प्रकार की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो यह लेख आपके लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि संविधान संशोधन से अधिकतर कई सवाल पूछे जाते हैं। अगर आप भी 101 संविधान संशोधन से संबंधित जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लेख को अंत तक पढ़े।
101वें संविधान संशोधन के फायदे।
भारत सरकार द्वारा किया गया 101वें संविधान संशोधन अधिनियम के द्वारा भारतीय संविधान में वस्तु एवं सेवा कर यानि GST को शामिल किया गया है। आप इसका जिक्र अनुच्छेद 366 (12A) में देख सकते हैं। इसके द्वारा कहा गया है कि GST सेवाओं, वस्तुओं एवं दोनों की आपूर्ति पर लगाया जाएगा। साथ में शराब की बिक्री इस दायरे से बाहर रहेगी।
भारत में GST लागू होने के बाद कई प्रकार के लाभ देखने को मिलेंगे जैसे कि भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव आया है। इसे लागू होने के पहले केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा अलग-अलग प्रकार के कई तरह कर वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगाई जाती थी। लेकिन GST आने के बाद उन सभी को मिलाकर एक ही कर दिया गया है।
इसका मतलब है कि एक ही वस्तु पर बार-बार लगने वाला कर की समस्या खत्म हो गई है। इसके अलावा ग्राहकों को सबसे बड़ा फायदा यह मिला है कि पहले उन्हें वस्तुओं पर 25% से 30% तक का कर देना होता था, लेकिन GST आने से यह कम हो गया है। साथ में अभी के समय में सभी ग्राहक पूरी जानकारी साफ-साफ देख सकते हैं जिससे लोगों को यह पता चलता है कि उन्होंने वास्तव में कितना कर दिया है।
101वाँ संविधान संशोधन कब हुआ था? । 101 va Samvidhan Sanshodhan Kab Hua
आपको बता दें की सबसे पहले GST विधेयक को पहली बार 2014 में 16वीं लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन मई 2015 में इसे लोकसभा के द्वारा पारित कर दिया गया था। इसके बाद इसमें कुछ बदलाव किए गए और अगस्त 2016 में राज्यसभा के द्वारा इसे मंजूरी दी गई थी।
जरूरी संख्या में राज्यों द्वारा अनुमोदन के बाद 8 सितंबर 2016 को इस विधेयक को राष्ट्रपति के द्वारा मंजूरी दी गई थी और यही 101 वां संविधान संशोधन बना था। इसे 1 जुलाई 2017 को पूरे भारतवर्ष में वस्तु एवं सेवा कर GST के रूप में लागू किया गया था।
101वें संविधान संशोधन अधिनियम
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 246 राज्य विधानसभाओं और संसद के बीच कानून बनाने की शक्तियों को अलग-अलग करता है। इसमें कर लगाने की शक्तियां भी शामिल है। इसका उद्देश्य यह है कि राज्य और केंद्र सरकार की वित्तीय शक्तियां साफ-साफ अलग हो और आपस में टकराव भी बहुत कम हो।
आपको बता दे कि केंद्र सरकार ज्यादातर वस्तुओं के निर्माण पर कर लगती है, लेकिन शराब, अफीम और नशीली दवाइयां पर कर नहीं लगती है। वहीं राज्य सरकार द्वारा वस्तुओं की बिक्री पर कर लगाई जाती है, लेकिन निर्माण पर नहीं लगाई जाती है। अगर कोई वस्तु एक राज्य से दूसरे में बिकती है तो उसे पर केंद्र द्वारा ‘केंद्रीय बिक्री कर’ लगाया जाता है लेकिन यह पैसा इस राज्य को मिलता है जिस राज्य से सामान की बिक्री हुई है।
इसके अलावा सेवाओं पर कर लगाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास होता है, वही आयात और निर्यात पर भी कर लगाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को है। इसीलिए जब GST लागू हुआ तो संविधान में संशोधन यानी बदलाव किया गया जिससे केंद्र और राज्य दोनों मिलकर GST वसूल सके और बांट सके।
विधेयक के आवश्यक प्रावधान
- केंद्र जीएसटी (CGST) में सेव कर उत्पाद शुल्क और अन्य केंद्रीय शुल्क शामिल होता है।
- राज्य जीएसटी (SGST) में विलासिता कर, वेट और अन्य राज्य स्तरीय कर शामिल होता है।
- अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करने के लिए जीएसटी को एकत्रित जीएसटी (IGST) के रूप में लागू किया गया है। IGST कोई अलग कर नहीं है बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच बंटवारे में समन्वय स्थापित करने का एक तंत्र है।
- इन्हीं शब्दों को सक्षम बनाने के लिए संविधान में संशोधन किया गया जिसके अंतर्गत अनुच्छेद 246(A), 279(A) और 279(A) को भी शामिल किया गया है। साथ ही 7वीं अनुसूची में प्रमुख परिवर्तन भी किए गए हैं।
अनुच्छेद 246(A) के प्रमुख बातें
अनुच्छेद 246(A) यह कहता है कि राज्य और केंद्र सरकार दोनों वस्तु एवं सेवा पर कानून बना सकते हैं। इसका मतलब है कि राज्य के अंदर किसी भी तरह के व्यापार के मामले में राज्य और केंद्र सरकार दोनों को ही जीएसटी लगाने का अधिकार है। लेकिन अंतर राज्य व्यापार के मामलों में सिर्फ केंद्र सरकार के पास से GST लगाने का प्रावधान है।
अनुच्छेद 269(A) के प्रमुख बातें
अनुच्छेद 269(A) GST के अंदर अंतर – राज्यीय व्यापार का से जुड़ा हुआ है। अनुच्छेद 269(A) के अंदर यह प्रावधान है कि भारत सरकार इस कर को एकत्रित करेगी और फिर GST परिषद की सिफारिश के अनुसार इस केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बटेगी।
अनुच्छेद 279(A) के प्रमुख बातें
अनुच्छेद 279(A) यह कहता है कि GST लागू होने के 60 दिनों के अंदर ही राष्ट्रपति को जीएसटी परिषद बनानी होती हैं। इसका अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करता है जबकि केंद्रीय राजस्व या वित्त राज्य मंत्री इसके सदस्य होते हैं। हर राज्य अपने वित्त मंत्री या कर मंत्री को सदस्य के रूप में भेजता है।
वही निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार के पास 1/3 वोट की ताकत होती है, जबकि सभी राज्यों के पास मिलकर ⅔ वोट की ताकत होती है। आपको बता दें कि कोई भी फैसला को पास करने के लिए ¾ बहुमत जरूरी होता है।
निष्कर्ष:
बढ़ते समय के साथ अलग-अलग परिस्थितियों को देखते हुए भारतीय संविधान में संशोधन करना जरूरी होता है। संविधान संशोधन देश के लोगों के लिए ही किया जाता है, और अभी तक 106 बार संविधान में संशोधन हो चुका है। ऐसे में ऊपर दिए गए लिख के द्वारा हमने आपको 101 va samvidhan sanshodhan kab hua से जुड़ा जानकारी दिया है। अगर आप भी 101 कर संविधान संशोधन कब हुआ था के बारे में जानना चाहते हैं या इससे जुड़ा कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो ऊपर दिए गए लेख को अंत तक पढ़े। उम्मीद करता हूं यह लेख आपको पसंद आया होगा इसे पढ़ने के लिए धन्यवाद।
इन्हें जरूर पढें–

