Swar sandhi Kise Kahate Hain – आज आपके लिये लाये हैं हिन्दी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण टापिक जो हिन्दी के प्रश्न पत्र में तकरीबन अनिवार्य ही होता है। यहाँ हम चर्चा करने जा रहें हैं कि स्वर संधि (Swar sandhi Kise Kahate Hain) की परिभाषा, स्वर संधि के भेद व स्वर संधि के उदाहरण आदि के सम्बन्ध में। UP SI, SSC GD, UPPSC आदि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में संधि व संधि विच्छेद से प्रश्न पूछे जाते हैं। तो आइये हम बिना समय गवांये जानते हैं, स्वर संधि, उदाहण व उसके भेद के बारे में।
स्वर संधि की परिभाषा (Swar Sandhi Kise Kahate Hain)
जब स्वर के साथ स्वर का मिलन होता है तो इस प्रकार के परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं। हिंदी भाषा में 11 स्वर होते हैं। शेष सभी व्यंजन होते हैं। जब दो स्वरों का मिलन होता है, इससे तीसरा स्वर बनता है जिसे स्वर संधि कहते हैं।
स्वर संधि के उदाहरण (Swar Sandhi Ke Udaharan)
- हिमालय=हिम + आलय
- रवींद्र =रवि + इन्द्र
- गिरीश =गिरि + ईश
स्वर संधि के प्रकार (Swar Sandhi Ke Bhed)
हिंदी भाषा में स्वर संधि पांच प्रकार के होते हैं जो निम्नवत हैं-
1.दीर्घ संधि
2.वृद्धि संधि
3.गुण संधि
4.यण संधि
5.अयादि संधि
दीर्घ संधि किसे कहते हैं – Dirgha Sandhi Kise Kahate Hain
यदि दो सजातीय स्वरों का मिलन होता है तो इनके मेल से सजातीय दीर्घ स्वर बनता है, जिसे दीर्घ संधि कहा जाता है।
सजातीय स्वर का अर्थ इस प्रकार है कि यदि अ, आके साथ अ,आ जुड़ता है तो आ बन जाता है, जब इ,ई के साथ इ,ई जुड़ता है तो ई बन जाता है, यदि उ,ऊ के साथ उ,ऊ आता है तो वह ऊ बन जाता है
नोट- अर्थात् दो पदों के मिलने से जब दीर्घ श्वर (आ,ई,ऊ) बनता है तो दीर्घ संधि होती है।
| अ+आ=आ
आ+अ=आ आ+आ= आ |
इ+ई=ई
ई+इ=ई ई+ई=ई |
उ+ऊ=ऊ
ऊ+उ=ऊ ऊ+ऊ=ऊ |
दीर्घ संधि के उदाहरण (Dirgha Sandhi Ke Udaharan)
- धर्मार्थ– धर्म+ अर्थ
- पुस्तकालय – पुस्तक+ आलक
- मनीष– मनि + ईश
- भानूदय – भानु + उदय
- विद्यार्थी – विद्या + अर्थी
- हिमालय – हिम + आलय
- वधूर्जा- वधु + ऊर्जा
1.जब अ + अ मिलते हैं तो आ बनता है-
- अधिकांश – अधिक+ अंश
- अन्नाभाव – अन्न + अभाव
- देवार्चन – देव + अर्चन
- वीरांगना – वीर + अंगना
- परमाणु – परम + अणु
- सूर्यास्त – सूर्य + अस्त
- स्वार्थी – स्व + अर्थी
- सत्यार्थी – सत्य + अर्थी
- पराधीन– पर + अधीन
- स्वार् – स्व + अर्थ
- परमार्थ – परम + अर्थ
2.जब अ + आ मिलते है तो आ बनता है।
- सत्याग्रह- सत्य+ आग्रह
- प्राणायाम – प्राण + आयाम
- शुभारंभ – सुभ + आरम्भ
- हिमालय – हिम + आलय
- साकार – स + आकार
- शिवालय – शिव + आलय
- पुस्तकालय – पुस्तक + आलय
- न्यायालय – न्याय + आलय
- भोजनालय – भोजन + आलय
- देवालय– देव + आलय
- विस्मयादि- विस्मय + आदि
3.जब आ + अ मिलकर आ बनाते हैं
- कदापि– कदा + अपि
- सीमांत – सीमा + अंत
- विद्यार्थी – विद्या + अर्थी
- शिक्षार्थी – शिक्षा + अर्थी
- परीक्षार्थी – परीक्षा + अर्थी
- यथार्थ – यथा + अर्थ
- दीक्षांत– दीक्षा + अंत
4.जब आ + आ मिलते हैं तो आ बनता है
- महानंद- महा + आनंद
- दयानंद – दया + आनंद
- महात्मा – महा + आत्मा
- वार्तालाप – वार्ता + आलाप
- श्रद्धानंद – श्रद्धा + आनंद
- महाशय – महा + आशय
- विद्यालय– विद्या + आलय
5.जब इ+इ मिलते है तो ई बनता है
- अतीब- अति + इव
- मुनींद्र – मुनि + इन्द्र
- रवींद्र- रवि + इंद्र
- कपींद्र – कपि+ इंद्र
- प्रतीत – प्रति + इति
6.जब इ+ ई मिलते है तो ई बनता है
- कपि + ईश – कपीश
- हरि + ईश – हरीश
- परि + ईक्षा – परीक्षा
- मुनि + ईश्वर – ईश्वर
7.जब ई + ई मिलते है तो ई बनता है
- नारीश्वर – नारी + ईश्वर
- रजनीश – रजनी+ ईश
- सतीश – सती + ईश
- नदीश्वर – नदी + ईश्वर
8.जब उ + उ मिलते हैं तो ऊ बनता है
- गुरूपदेश – गुरु + उपदेश
- सूक्ति – सु + उक्ति
- भानूदय – भानु + उदय
9.जब उ + ऊ मिलते हैं तो ऊ बनता है
- लघूर्मि – लघु + ऊर्मि
- धनूष्मा – धनु + ऊष्मा
- बहूर्ध्व – बहु + ऊर्ध्व
10.जब ऊ + उ मिलते हैं तो ऊ बनता है
- वधूत्सव – वधू + उत्सव
- भूत्सर्ग – भू + उत्सर्ग
- वधूपकार – वधू + उपकार
11.जब ऊ + ऊ मिलते हैं तो ऊ बनता है
- सरऊर्मि – सरयू + ऊर्मि
- भूर्जा – भू + ऊर्जा
गुण संधि (Gun Sandhi Kise Kahate Hain)
जब अ, आ के साथ इ, ई मिलते हैं तो ए बनता है, अ, आ के साथ उ, ऊ मिलता है तो ओ बनता है तथा जब अ, आ के साथ ऋ मिलता है तो अर् बन जाता है, गुण संधि कहलाता है।
नोट- जब दो शब्दों के मेल से ए, ऐ बन जाता है वहाँ गुण संधि होती है।
गुण संधि के उदाहरण (Gun Sandhi Ke Udaharan)
1.जब अ + इ मिलते हैं तो ए बन जाता है
- भारतेंदु – भारत + इन्दु
- सत्येन्द्र – सत्य + इन्द्र
- स्वेच्छा – स्व + इच्छा
- नरेश- नर + ईश
2.जब आ + इ मिलते है तो ए बन जाता है
- रमेन्द्र – रमा + इन्द्र
3.जब आ + ई मिलते है तो ए बन जाता है
- महेश – महा + ईश
- रमेश – रमा + ईश
4.जब अ + उ मिलते हैं तो ओ बन जाता है
- वीरोचित- वीर + उचित
- नरोत्तम- नर + उत्तम
- पूर्वोदय – पूर्व + उदय
- लोकोक्ति – लोक + उक्ति
- परोपकार – पर + उपकार
- नरोत्तम – नर + उत्तम
5.जब अ + ऊ मिलते हैं तो ऊ बन जाता है
- परोपकार- पर + उपकार
- हितोपदेश – हित + उपदेश
6.जब आ + ऊ मिलते है तो ओ बन जाता है
- महोत्सव – महा + उतस्व
- महोष्म – महा + ऊष्म
7.जब अ + ऋ मिलते हैं तो अर बन जाता है
- देवर्षि- देव + ऋषि
- सप्तर्षि – सप्त + ऋषि
वृद्धि संधि (Vriddhi Sandhi Kise Kahate Hain)
जब अ, आ के साथ ए, ऐ आता है तो दोनों मिलकर ऐ बनाते हैं और जब अ, आ के साथ ओ, औ मिलते हैं तो औ बनाते हैं। इस प्रक्रिया को वृद्धि संधि कहते हैं।
नोट- जब दो शब्दों के मेल से ऐ, औ बन जाता है वहाँ वृद्धि संधि होती है
वृद्धि संधि के उदाहरण (Vriddhi Sandhi Ke Udaharan)
1.जब अ + ए मिलते हैं तो ऐ बनता है
- मतैकता- मत + एकता
- एकैक – एक + एक
2.जब अ + ऐ मिलते हैं तो ऐ बनता है
- मतैक्य – मत + ऐक्य
- नवैश्वर्य – नव + ऐश्वर्य
3.जब आ + ए मिलते हैं तो ऐ बनता है
- सदैव – सदा + एव
- तथैव – तथा + एव
4.जब अ + ओ मिलते हैं तो औ बन जाता है
- वनौषधि- वन + औषधि
- जलौघ – जल + ओघ
5.जब अ + औ मिलते हैं तो औ बन जाता है।
- परमौषधि – परम + औषधि
- परमौदार्य – परम + औदार्य
6.जब आ + ओ मिलते हैं तो औ बन जाता है।
- महौजस्वी – महा + ओजस्वी
- महौज – महा + ओज
7.जब आ+ औ मिलते हैं तो औ बन जाता है।
- महौषधि – महा + औषधि
- महौघ – महा + औघ
यण संधि (Yan Sandhi Kise Kahate Hain)
जब इ, ई के साथ कोई दूसरा स्वर मिलता है तो य बन जाता है और जब उ,ऊ के साथ कोई दूसरा स्वर मिलता है तो व् बन जाता है और जब ऋ के साथ कोई दूसरा स्वर मिलता है तो र बन जाता है।
नोट- जब किसी शब्द के मध्य में य और व के साथ आधा अक्षर(व्यंजन) जुड़ा हुआ मिलता है और ऋ भी मध्य में आये तो वहाँ यण संधि की पहचान कर सकते हैं।
यण संधि के उदाहण (Yan Sandhi Ke Udaharan)
1.जब इ + अ से मिलते हैं तो य बन जाता है।
- अति + अधिक – अत्यधिक
- यदि + यपि – यद्यपि
- अति + अन्त – अत्यन्त
2.जब ई + अ मिलते हैं तो य बन जाता है।
- नदी + अम्बु – नद्यम्बु
3.जब इ + आ मिलते हैं तो या बन जाता है।
- इति + आदि – इत्यादि
- अति + आचार – अत्याचार
- परि + आवरण – पर्यावरण
- अति + आवश्यक – अत्यावश्यक
4.जब ई + आ मिलते हैं तो या बन जाता है।
- देवी + आगम – देव्यागम
- नदी + आमुख – नद्यामुख
5.जब इ + उ मिलते हैं तो यु बन जाता है।
- प्रति + उपकार – प्रत्युपकार
- उपरि + युक्त – उपर्युक्त
6.जब इ + ऊ मिलते हैं तो यू बन जाता है।
- नि + ऊन – न्यून
- वि + ऊह – व्यूह
7.जब इ + औ मिलते हैं तो यौ बन जाता है।
- अति + औचित्य – अत्यौचित्य
8.जब इ + ओ मिलते हैं तो यो बन जाता है।
- दधि + ओदन- दध्योजन
9.जब उ + अ मिलते हैं तो व बन जाता है।
- सु + अच्छ – स्वच्छ
- मधु + अरि – मध्वरि
10.जब उ + आ मिलते हैं तो वा बन जाता है।
- सु + आगतम- स्वागतम
11.जब उ + इ मिलते हैं तो वि बन जाता है।
- अनु + इत – अन्वित
12.जब उ + ए मिलते हैं तो वे बन जाता है।
- अनु + एषण – अन्वेषण
13.जब उ + ओ मिलते हैं तो वो बन जाता है।
- गुरु + ओदन – गुरूदन
14.जब उ + औ मिलते हैं तो वौ बन जाता है।
- गुरु + औदार्य – गुर्वौदार्य
15.जब ऋ + अ मिलते हैं तो रा बन जाता है।
- मातृ + आज्ञा – मात्राज्ञा
- मात्रा + आनंद – मात्रानंद
16.जब ऋ + इ मिलते हैं तो रि बन जाता है।
- मातृ + इच्छा – मात्रिच्छा
अयादि संधि (Ayadi Sandhi Kise Kahate Hain)
यदि ए, ऐ, ओ, औ के साथ कोई दूसरा स्वर जुड़ता है तो ए का अय में, ऐ का आय में, ओ का अव में, औ का आव में परिवर्तन हो जाता है। जिसे अयादि सन्धित कहते हैं।
नोट- इस प्रकार के शब्दों के मध्य में अय, आय, अव तथा आव मिलते हैं।
अयादि संधि के उदाहरण (Ayadi Sandhi Ke Udaharan)
1.जब ए + अ मिलते हैं तो अय बन जाता है।
- शे + अन – शयन
- ने + अन – नयन
2.जब ऐ + अ मिलते हैं तो आय बन जाता है।
- नै + अक – नायक
- गै + गायक
3.जब ओ + अ मिलते हैं तो अव् बन जाता है।
- पो + अन – पवन
- भो + अन – भवन
4.जब औ + अ मिलते हैं तो आव् बन जाता है।
- पौ + अक – पावक
- पौ + अन – पावन
5.जब औ + इ मिलते हैं तो आवि बन जाता है।
- नौ + इक – नाविक
- पौ + इत्र – पवित्र
निष्कर्ष-
आज के इस अध्याय में Swar sandhi Kise Kahate Hain, Swar Sandhi Ke Bhed के बारे में विस्तृत जानकारी दी, आशा करते हैं यह आपको बहुत ज्ञानवर्धक लगा होगा। अपने दोस्तो व सहपाठियों को शेयर करें जिससे वह भी लाभान्वित हो सकें। हिन्दी व्याकरण से सम्बन्धित और भी टापिक के बारे में सही व सटीक जानकारी के लिये जुड़े रहें हमारे साथ। धन्यवाद…
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