भविष्य में होने वाली दरोगा भर्ती परीक्षा, एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा व यूपी पीसीएस में हिन्दी व्याकरण के संज्ञा वाले चैप्टर से 2-3 प्रश्न तो अवश्य ही पूछे जाते हैं। आज हम इस अध्याय में द्रव्य वाचक संज्ञा के बारे में चर्चा करने वाले हैं।
वह संज्ञा शब्द जिससे किसी द्रव्य अर्थात पदार्थ वस्तु या सामग्री का बोध होता है, उसे द्रव्य वाचक संज्ञा कहा जाता है।
हिंदी व्याकरण की दृष्टि से संज्ञा और इसके भेद को जानना अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इनके बिना शब्दों को अच्छी तरह से नहीं समझा जा सकता है। हिंदी भाषा में किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, जानवर, दिन या महीना के नाम को संज्ञा कहा जाता है। सरल भाषा में कहे तो हमारे परिवेश में जितनी भी वस्तुएं पाई जाती हैं, उनके नाम को संज्ञा कहा जाता है।
संज्ञा के पांच भेद होते हैं, जिसमें से द्रव्य वाचक संज्ञा भी एक भेद है। पिछले ब्लाग पोस्ट में हमने संज्ञा के एक भेद व्यक्तिवाचक संज्ञा के बारे में विस्तार से चर्चा की थी। आज के अध्याय में हम जानेंगे की द्रव्य वाचक संज्ञा किसे कहते हैं, साथ ही साथ द्रव्य वाचक संज्ञा के उदाहरण भी पढ़ेंगे।
द्रव्य वाचक संज्ञा अनकाउंटेबल अर्थात अगणनीय प्रकार की होती हैं। अर्थात इन्हें गिना नहीं जा सकता है बल्कि इन्हें मापा और तौला जा सकता है। जैसे- पानी, तेल, दूध, लोहा, मिट्टी, गेहूं, चावल आदि
द्रव्यवाचक संज्ञा किसे कहते हैं? – Dravya Vachak Sangya Kise Kahate Hain
द्रव्य वाचक संज्ञा की परिभाषा (Dravya Vachak Sangya Ki Paribhasha)-वह संज्ञा जिससे किसी द्रव्य अर्थात पदार्थ, वस्तु या सामग्री का बोध होता है, द्रव्य वाचक संज्ञा कहलाते हैं, द्रव्य वाचक संज्ञाओं को गिना नहीं जा सकता है अर्थात इन्हें मापा और तौला जा सकता है। जैसे- हवा, पानी, मिट्टी, सोना, चांदी, तेल आदि।
ऊपर दिये गये द्रव्य वाचक उदाहरणों में हवा, पानी, सोना, चांदी आदि को गिना नहीं जा सकता है केवल तौला या मापा जा सकता है। अतः उपरोक्त द्रव्य वाचक संज्ञा हैं।
द्रव्यवाचक संज्ञा के 10 उदाहरण ।
- कोयला
- सोना
- लोहा
- चांदी
- दूध
- दही
- तेल
- मिट्टी
- चीनी
- गेंहू
- चावल
द्रव्यवाचक संज्ञा के 100 उदाहरण । Dravya Vachak Sangya Ke 100+ Udaharan
द्रव्य वाचक संज्ञा से सम्बन्धित 100 से अधिक उदाहरण नीचे दिये जा रहे हैं। इन्हें पढ़े और कंठष्थ करें।
| रसायन | चांदी | एल्युमिनियम |
| लोहा | सोना | स्टील |
| तांबा | लोहा | पीतल |
| चावल | पारा | नाइट्रोजन |
| गेहूं | दूध | हवा |
| चीनी | पानी | जस्ता |
| दही | तेल | हीलियम |
| ऑक्सीजन | जूस | शराब |
| निकिल | आटा | पनीर |
| कार्बन डाइऑक्साइड | चावल | तेल |
| क्रोमियम | हाइड्रोजन | घी |
| मीथेन | चीनी | गैस |
| दाल | दूध | कोयला |
| मसाले | फल | ईंधन |
| धूल | कॉफी | इत्र |
| हीरा | चाय | पेट्रोल |
| शर्बत | सीमेंट | वर्षा |
| दवा | बालू | स्टील |
| मिट्टी | पत्थर | कागज |
| पेट्रोल | सिरका | अम्ल |
| केरोसिन | स्याही | कड़ी |
| जूते | रबर | चावल |
| मार्बल | सीमेंट | ग्रेनाइट |
| प्लास्टिक | हवा | सीसा |
| धातु | खून | नाइट्रोजन |
| गोंद | कैरोसिन | लावा |
द्रव्यवाचक संज्ञा के 10 उदाहरण वाक्य – Dravya Vachak Sangya Ke Udaharan
1.बेसन में नमक एवं मसाले को मिलाकर पकौड़े बनाए जाते हैं ।
2.सोना एक बहुमूल्य धातु है ।
3.आक्सीजन जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण पदार्थ है ।
4.वायु से पौधे ऑक्सीजन अवशोषित करते हैं।
5.लोहे का उपयोग नाव बनाने, औजार बनाने एवं फर्नीचर आदि बनाने में किया जाता है।
6.चांदी से सिक्के और अन्य बहुमूल्य वास्तु में बनाई जाती हैं।
7.शराब पीने के लीवर खराब हो जाता है।
8.सिरका एक स्वादिस्ट खाद्य पदार्थ है।
9.लोहा एक मजबूत पदार्थ है।
10.पारा एक तरल खनिज पदार्थ है।
द्रव्यवाचक संज्ञा की विशेषताएं- Dravya Vachak Sangya Ki visheshta
1.द्रव वाचक संज्ञा कभी भी बहुवचन नहीं होती है।
2.द्रव वाचक संज्ञा की मात्रा को बताने के लिए इकाई, दर्जन, सैकड़ा आदि शब्दों का प्रयोग करके व्यक्त किया जाता है ।
3.द्रव वाचक संज्ञा को जीना नहीं जा सकता अतःइन्हें केवल माप और तौला जा सकता है।
द्रव्य वाचक संज्ञा का प्रयोग
द्रव्यवाचक संज्ञा को वाक्यों में निम्न प्रकार से प्रयोग में लाया जाता है। अलग-अलग तरीके से द्रव्य वाचक संज्ञाओं का उपयोग नीचे कुछ वाक्यों में दिया जा रहा है।
कर्ता के रूप में द्रव वाचक संज्ञा का प्रयोग
1.खाना खाना सभी जीवों के लिए आवश्यक है
2.दूध पीने से शरीर स्वस्थ रहता है
3.तेल लगाने से बोल मुलायम होते हैं
4.घी बनाना एक जटिल कार्य है
कर्म के रूप में द्रव्य वाचक संज्ञा का प्रयोग
1.मैंने दूध पिया
2.उसने दूध बेच दिया
3.उसने सोने के आभूषण बनाएं
विषय के रूप में द्रव वाचक संज्ञा का प्रयोग
1.तेल एक ज्वलन सील पदार्थ है
2.सोना एक बहुमूल्य धातु है
3.ऑक्सीजन एक महत्वपूर्ण गैस है
4.पनीर एक खाद्य पदार्थ है
अधिकरण के रूप में द्रव वाचक संज्ञा का प्रयोग
1.पानी में डूबना
2.पानी में नमक डालना
3.घी में सब्जी बनाना
4.दूध में चीनी मिलाना
संबंध के रूप में द्रव वाचक संज्ञा का प्रयोग
1.पानी का घनत्व
2.तेल का तापमान
3.दूध का स्वाद
4.लोहे का घनत्व
निष्कर्ष
आशा करते हैं कि आज का यह लेख ,,द्रव्य वाचक संज्ञा (Dravya Vachak Sangya) किसे कहते हैं,, काफी पसंद आया होगा और आपको कुछ नया सीखने को मिला होगा। इसे आप अपने दोस्तों और सहपाठियों को भेज भी कर सकते हैं ताकि उन्हें भी लाभ मिल सके आप नीचे दिए गए लेख को भी पढ़ सकते हैं।

