Vayumandal Ki Partein एवं वायुमण्डल की संरचना-पृथ्वी का वायुमंडल (vayumandal) विभिन्न गैसों के मिश्रण से बना हुआ है जिसमें नाइट्रोजन सबसे अधिक 78 परसेंट पाई जाती है एवं ऑक्सीजन 21 परसेंट पाई जाती है जबकि 1 प्रतिशत में अन्य गैसें पाई जाती हैं, इन गैसों के कारण ही पृथ्वी पर जीवन संभव हुआ है।
नाइट्रोजन N2
यह गैस वायुमंडल में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण गैसों में से एक है। वायुमंडल में यह 78% पाई जाती है, पृथ्वी पर इस गैस का अस्तित्व होने के कारण विभिन्न जीवों के पोषक तत्व की पूर्ति मे सहायक है।
ऑक्सीजन o2
यह गैस मानव जीवन एवं वनस्पतियों के लिए अति महत्वपूर्ण है इस गैस के बिना मानव जीवन की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती। यह गैस पृथ्वी के वातावरण में 21% विद्यमान है।
पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में ऑक्सीजन गैस का निर्माण किया जाता है एवं मनुष्यों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड गैस वातावरण में रिलीज की जाती है जिससे वातावरण में गैसों का संतुलन बना रहता है।
कार्बन डाइऑक्साइड CO2
यह गैस विभिन्न प्रकार के जीवाश्मों, पेट्रोल, ईंधन आदि के जलने के पश्चात वातावरण में रिलीज की जाती हैं। यह गैस एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है, इसकी अधिकता मानव जीवन एवं वनस्पतियों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है।
Vayumandal Ki Partein। वायुमण्डल की परतें
पृथ्वी पर Vayumandal Ki Parat की मुख्यतः 7 परतें पाई जाती हैं। पृथ्वी पर मुख्यतः वायुमंडल की 07 परतें पाई जाती हैं जो अपनी-अपने स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं जिससे पृथ्वी पर जीवन की सभी क्रियाएं सुचारू रूप से चलती रहती हैं। इनका विस्तृत विवरण नीचे दिया जा रहा है।
छोभ मंडल
1.वायुमंडल की सबसे निचली परत है, जिसमें वायुमंडल की सभी भौतिक एवं रासारयनिक क्रियाएं होती हैं। छोभ मंडल पृथ्वी सतह से 12 किलोमीटर ऊंचाई तक पाई जाती हैं, जिसकी ऊंचाई ध्रुव पर सबसे कम एवं भूमध्य रेखा पर सबसे अधिक होती है।
2.प्रकाश संश्लेषण एवं स्वसन क्रिया हेतु पाई जाने वाली गैस इसी परत में पाई जाती हैं, जलवाष्प का एक 99% भाग भी इसी वायु मंडल की परत में पाया जाता है।
3.छोभ मंडल में ऊंचाई के साथ-साथ तापमान कम होता जाता है। इसके ऊपरी भाग में जहां यह घटना होती है, उसे ट्रोपोपॉज कहा जाता है।
4.मौसम की सभी परिघटनाएं लगभग इसी मंडल में देखने को मिलती हैं। अलग-अलग मौसम में होने वाले लगभग सभी प्रकार के बदलाव इसी मंडल में ही देखने को मिलते हैं।
समताप मंडल
1.वायुमंडल की यह परत पृथ्वी के ऊपर 12 किलोमीटर से 50 किलोमीटर ऊंचाई तक पाई जाती है सफलता मंडल में ही ओजोन परत पाई जाती है।
2.समताप मंडल में ऊंचाई के साथ-साथ तापमान में वृद्धि होती जाती है ओजोन गैस के निर्माण में ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसी उत्पन्न ऊष्मा के कारण ही तापमान में वृद्धि देखी जाती है।
3.समताप मंडल में बादल एवं मौसमी घटनाएं बिल्कुल नहीं देखने को मिलती हैं वायुयान उड़ने के लिए यह सबसे अच्छा मंगल है।
4.यह वायुमंडल का सबसे उच्चतम परत है जहां पर जेट विमान उड़ाया जा सकते हैं।
मध्य मंडल
1.वायुमण्डल की यह परत पृथ्वी सतह से 50 से 80 किलोमीटर ऊँचाई के मध्य पायी जाती है। मध्य मंडल का तापमान ऊंचाई के साथ-साथ लगातार बढ़ता जाता है।
2.इस भारत का सबसे ऊपर ही स्थान अत्यधिक ठंड होता है जिसका तापमान माइंस 80 डिग्री या माइनस 120 फॉरेनहाइट होता है।
3.मध्य मंडल के सबसे ऊपरी परत पर स्थित जलवाष्प संघनित होकर बादलों का निर्माण करती है जो पृथ्वी पर सबसे ऊंचा बादल होते हैं।
4.ज्यादातर उल्का पिंड मध्य मंडल में ही टूटte हुए दिखाई देते हैं।
5.समताप मंडल और मध्य मंडल को विभाजित करने वाली रेखा को स्ट्रेटोपॉज कहा जाता है।
ताप मंडल
1.वायुमण्डल की यह परत लगभग 80 से 700 किलोमीटर ऊँचाईयों के मध्य पाई जाती है, इसके निचले हिस्से में आयन मंडल स्थित है।
2.वायुमंडल की यह परत सूर्य के सबसे निकट है। सूर्य के नजदीक होने के कारण इसका तापमान अधिकतम 2000 डिग्री सेंटीग्रेड तक चला जाता है।
2.इस भारत में ऊष्मा एवं जलवाष्प बिल्कुल ही नहीं पाई जाती हैं
3.वायुमंडल की इस परत में ऊंचाई के साथ-साथ तापमान गर्म होता जाता है
4.अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का प्रक्षेपण इसी मंडल में है जो इसी मंडल में परिक्रमा करता रहता है
आयन मंडल
1.यह वायुमंडल की कोई एक अलग परत नहीं है ऊपर दी गई वायुमंडलीय प्रत्येक आयन मंडल मध्य मंडल बाई मंडल को ओवरलैप करती है।
2.यह वायुमंडल का सबसे अधिक सक्रिय भाग है जो सूर्य से अवशोषित ऊर्जा के कारण घटता बढ़ता रहता है।
3.यह एक विद्युत आवेशित क्षेत्र है जो रेडियो तरंगों को परावर्तित करके पृथ्वी सतह तक पहुंचने में मदद करता है।
4.इस प्रकार यहां पर मौजूद परमाणु और अनु मिलकर आयन बनाते हैं जिस कारण इस परत का नाम आयन मंडल पड़ा इस प्रकार यह एक विशेष प्रकार का गन रखता है।
बाह्य मंडल
1.यह वायुमंडल का सबसे ऊपरी भाग है जिसकी ऊंचाई 700 से 10000 किलोमीटर के मध्य पाई जाती है।
2.यहां पे जाने वाले अणुओं में घनत्व सबसे कम होता है, इसलिए यह भारत गैसों की तरह व्यवहार नहीं करती है यहां पे जाने वाले वायु के कान अंतरिक्ष में एस्केप कर जाते हैं।
3.पृथ्वी से प्रक्षेपित अधिकांश उपग्रह इसी वायुमंडल की परत में परिक्रमा करते हैं।
निष्कर्षः
परीक्षा के दृष्टिकोण से वायुमंडल की संरचना (Vayumandal Ki Sanrachna) वाला टापिक बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है सभी परीक्षार्थियों के लिए क्योंकि Vayumandal Ki Parte एक ऐसा टॉपिक है जिसकी जानकारी रखना हर स्टूडेन्ट को आवश्यक है। एवं परीक्षा में एक प्रश्न तो किसी न किसी रूप में पूछा ही जाता है। इसी तरह की और भी ज्ञानवर्धक एवं आपकी परीक्षा में अति महत्वपूर्ण वाले टॉपिक्स को कवर करते रहेंगे। इसके लिए आप हमारे साथ GKGSWALE.COM प्लेटफार्म से जुड़े रहें। धन्यवाद…
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